लखनऊ : केजीएमयू ट्रामा सेंटर का घायलों को भर्ती करने से इन्कार - Lucknow Headline
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लखनऊ : केजीएमयू ट्रामा सेंटर का घायलों को भर्ती करने से इन्कार

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लखनऊ : समय-समय पर अस्पतालों की लापरवाही सामने आती रहती है कभी अस्पताल लाखों का बिल मरीजों को थमा देते हैं तो कभी इलाज में लापरवाही करते हैं जिससे मरीजों की मौत तक हो जाती है । लखनऊ के केजीएमयू में ट्रामा सेंटर की सेवाएं नहीं सुधर रही हैं। यहां रात में आए घायलों का अधूरा इलाज कर भगा दिया गया। वहीं बेहोशी की हालत में अस्पताल पहुंचे मरीज को ट्रामा रेफर किया गया। यहां डॉक्टर घायलों को भर्ती करने से साफ इन्कार कर रहे हैं ।

रात में आए घायलों को बेहोशी की हालत में ट्रामा सेंटर से भगाया

 

बस्ती निवासी मनीराम दुर्घटना का शिकार हो गए थे। उनके सिर, हाथ-पैर, आंख में गंभीर चोटे थीं। स्थानीय अस्पताल ने हालत गंभीर होने पर मनीराम को केजीएमयू रेफर किया। बेटे हरिश्चंद्र रात एक बजे पिता मनीराम को लेकर ट्रामा सेंटर पहुंचे। हरिश्चंद्र के मुताबिक डॉक्टरों ने सीटी स्कैन, खून आदि की जांचें कराई। हालत गंभीर देख कैजुअल्टी से न्यूरो सर्जरी वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया, मगर वार्ड में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों ने इलाज नहीं किया। उन्हें एक ग्लूकोज की बोतल लगाकर छोड़ दिया। इस दौरान वह स्ट्रेचर पर पड़े तड़पते रहे। ट्रामा में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों ने भर्ती से साफ इन्कार कर दिया। बेहोशी की हालत में मनीराम को शुक्रवार को लेकर दोबारा बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया। हरिश्चंद्र के मुताबिक ट्रामा सेंटर में डॉक्टर ने बेड खाली न होने का हवाला देकर भगा दिया, जबकि वार्डो में बेड खाली थे। इसी बीच सिर व आंख के पास हुई ब्लीडिंग तक को साफ नहीं किया गया। ड्रेसिंग व टांके भी नहीं लगाए गए।हरिश्चंद्र, शैल, विमलेश व पम्मी सभी अपने मरीजों की हालत गंभीर बताकर भर्ती की फरियाद करते रहे। इलाज के लिए बार-बार गुहार लगाई। वहीं ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने बलरामपुर अस्पताल या फिर निजी अस्पताल ले जाने का फरमान सुना दिया। उन्होंने वार्ड में दोबारा भर्ती से साफ इन्कार कर दिया। ट्रामा सेंटर में 390 के करीब बेड हैं। वहीं 200 के करीब वार्डो में स्ट्रेचर लगे हैं। यहां इमरजेंसी में मरीजों को वार्डो में शिफ्टिंग में हीलाहवाली की जाती है। ऐसे में रात में इमरजेंसी में मरीज बढ़ जाते हैं और डॉक्टर बेड न होने का हवाला देकर मरीज को वापस कर देते हैं। वहीं विभाग के वार्ड में बेड खाली रहते हैं।

 

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