देवभूमि का यह लाल है त्रिपुरा में भाजपा की जीत का नायक

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हल्द्वानी : भारतीय जनता पार्टी त्रिपुरा में पहली बार अपने दम पर सरकार बनाने जा रही है । पिछली बार भाजपा को  त्रिपुरा में शून्य मिला था । लेकिन इस बार पार्टी ने कमाल कर दिया । भाजपा की इस बंपर जीत के पीछे एक ट्रंप कार्ड का हाथ है औप वह हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ । मुख्यमंत्री योगी को भारतीय जनता पार्टी ने त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान में ट्रंप कार्ड के रूप में प्रयोग किया और लेफ्ट को उसके ही किले में ढेर कर दिया ।

त्रिपुरा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ योगी आदित्यानाथ, नितिन गडकरी व राजनाथ सिंह भी स्टार प्रचारकों में शामिल थे। इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने त्रिपुरा में सात चुनावी रैली की थी। त्रिपुरा के वोटरों को रिझाने में योगी आदित्यनाथ के इलेक्शन कैंपेन ने अहम भूमिक निभाई। सीएम योगी आदित्यनाथ ने त्रिपुरा में चुनावी सभा के साथ दो रोड-शो भी किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में नाथ संप्रदाय की मठ के महंत हैं। त्रिपुरा में भी नाथ संप्रदाय की गहरी पैठ है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने यहां पर 59 में से बीस विधानसभा क्षेत्र में प्रचार किया था। जिसमें से 17 में भाजपा ने जीत दर्ज की है।

 उन्होंने दावा किया कि नागालैंड और मेघायल में भी बीजेपी का प्रदर्शन ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार के विकास के काम को देखते हुए पूर्वोत्तर के लोगों का विश्वास बढ़ा है। इन राज्यों के लोगों का यह विश्वास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वी भारत के विकास को लेकर जो रणनीति तय की है, वह बेहद कारगर होगी।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहली बार किसी सरकार ने पूर्वी भारत के विकास के बारे में सोचा है। विकास चंद लोगों की जेब में नहीं बल्कि जमीनी हकीकत पर दिखाई देना चाहिए। असम के बाद मणिपुर उसके बाद त्रिपुरा की जीत ने साबित का दिया कि सिर्फ भाजपा ही देश का विकास चाहती है। नागालैंड में भारतीय जनता पार्टी गठबंधन को ऐतिहासिक सफलता मिली है।

त्रिपुरा में नाथ संप्रदाय के मंदिर और अनुयायियों की संख्या काफी अधिक है। त्रिपुरा में पिछड़े वर्ग की आबादी करीब 30 प्रतिशत है। इसके साथ भाजपा की रणनीति अन्य हिंदू समुदायों को अपनी तरफ खींचने की थी। इसमें भाजपा कामयाब भी हुई। नाथ अनुयायी चाहते थे कि उन्हें पिछड़ी जाति का कोटा दिया जाए। नाथ संप्रदाय के इसी मुद्दे को लेकर बीजेपी ने त्रिपुरा में योगी को उतारने का बड़ा दांव खेला और सफल भी हुए। त्रिपुरा में वामपंथी सरकार को सत्ता से बाहर करने की बीजेपी की कोशिश आखिरकार कामयाब रही।

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