आयुर्वेद का कमाल,अपने पैरो पर खड़े हुए सनत जयसूर्या

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छिंदवाड़ा : लखनऊ हेडलाइन : हिन्दूस्तान के आयुर्वेद का लोहा दुनिया मानती है । भले ही भारतीय लोग आधुनिकता की दौड़ में अंधे होकर भाग रहे हों लेकिन आयुर्वेद आज भी प्रासंगिक बना हुआ है । ऐसी ही एक मिसाल हम आपको आज बताने जा रहे हैं । श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर सनत जयसूर्या ने कमर एवं पैर में आई कुछ गंभीर बीमारियों के चलते बिस्तर पकड़ लिया था, यदि उनको थोड़ा बहुत चलना भी पड़ा तो बैशाखी का सहारा लेते थे, इस बीमारी के चलते जयसूर्या ने आस्ट्रेलिया में भी आपरेशन कराया इसके अलावा श्रीलंका के कोलंबो स्थित नवलोक अस्पताल में भी भर्ती रहे। किन्तु इन्हें कहीं से भी राहत नहीं मिली।

जयसूर्या की इस हालत को देखकर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मो. अजहरूदीन काफी दुखी हुए। एवं आयुर्वेद जड़ी बुटियों से इलाज करने वाले डॉ. टाटा से एक बार इलाज कराने की सलाह दी। अजहरूदीन की सलाह मान जयसूर्या मुम्बई आए एवं डॉ. टाटा के निवास स्थान पर गए और अपनी बीमारी से उन्हें अवगत कराया जिसके बाद डॉ. टाटा ने उनका परीक्षण किया और ठीक करने से संबंधित आश्वासन दिया।

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डॉ टाटा भलीभांति इस बात को जानते थे, कि जयसूर्या इस बीमारी से निजात पाने आस्ट्रेलिया एवं श्रीलंका में इलाज करा चुके हैं। किन्तु उन्हें राहत नहीं मिल रही है । डॉ टाटा वैद्यराज माखन विश्वकर्मा के साथ पतालकोट के घने जंगलों में गए और एक सप्ताह वहॉ रुककर जड़ी-बूटी तलाश की एवं वहां से जड़ी-बूटी निज निवास लाकर छिंदवाड़ा में दवाईया बनाई।

आयुर्वेद जड़ी-बूटियों की आवश्यक दवाओं को एकत्रित कर डॉ. टाटा सहयोगीजन जय हो फाउंडेशन के अध्यक्ष तरूण तिवारी के साथ श्रीलंका रवाना हो गए। एवं श्रीलंका पहुंचने पश्चात जयसूर्या का इलाज प्रारंभ किया एवं महज 72 घण्टे का समय लिया एवं जयसूर्या को उनके पैरो पर खड़ा कर दिया। अब सनत जयसूर्या स्वस्थ हैं और बिना किसी सहारे के चल रहे हैं ।

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