धरती पर सिर्फ दो लोगों के पास हैं ,ऑस्कर और नोबेल दोनों

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नई दिल्ली :लॉस एंजिल्स में हाल ही में ऑस्कर अवॉर्ड्स समारोह संपन्न हुआ ।ऑस्कर अवॉर्ड और नोबेल प्राइज के बारे में तो आप सब जानते ही होंगे। ऑस्कर अवॉर्ड सिनेमा की फील्ड में असाधारण काम करने पर हासिल होता है । एक्टिंग, डायरेक्शन, सिंगिंग, राइटिंग इनमें से किसी भी एक डिपार्टमेंट में अच्छा काम करने पर आप ऑस्कर के दावेदार बन सकते हैं। 

नोबेल पुरुस्कार शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उम्दा काम करने पर दिया जाता है. इस पुरूस्कार को सर्वोच्च सम्मान हासिल है.दुनियाभर में इन दोनों पुरुस्कारों को अपने-अपने क्षेत्र में अल्टीमेट सम्मान माना गया है. किसी एक का भी आपके पास होना बड़े गर्व की बात है। लेकिन अगर किसी इंसान के पास दोनों अवॉर्ड हो तो । नोबेल प्राइज 1901 से बांटा जा रहा है. ऑस्कर अवॉर्ड्स की शुरुआत 1929 में हुई थी। सिर्फ दो लोग इस धरती के तख्ते पर हुए, जिनके पास ये दोनों अवॉर्ड्स हैं।

 

ये दो लोग हैं –

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ

बर्नार्ड शॉ एक आला दर्जे के प्ले राइटर थे. इसके अलावा वो आलोचक और पॉलिटिकल एक्टिविस्ट भी थे. उन्होंने फिल्मों के लिए भी लिखा. 1925 में साहित्य के लिए नोबेल प्राइज दिया गया. 13 साल बाद उन्हें ऑस्कर भी मिला. ‘पिगमेलियन’ फिल्म का स्क्रीनप्ले लिखने के लिए. ऑस्कर हासिल करते वक़्त उनकी उम्र 82 साल थी.

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ अपनी हाज़िरजवाबी के लिए मशहूर थे. एक किस्सा सुनाते हैं । एक दिन पुरानी किताबों की दुकान में शॉ को उनकी ही लिखी एक किताब मिल गई. जिसपर उन्होंने अपने हाथ से अपने एक मित्र के लिए लिखा हुआ था: “प्रिय मित्र….. को, आदर सहित, जॉर्ज बर्नार्ड शॉ.”शॉ ने फ़ौरन वह किताब खरीद ली और उसी मित्र को वह किताब फिर से भेज दी. नीचे नोट में लिखा था, “अपडेटेड आदर के साथ, जॉर्ज बर्नार्ड शा.”

बॉब डिलन

बॉब डिलन अमेरिकन गायक, गीतकार और लेखक हैं। 60 के दशक में अमेरिका में जब क्रॉस कल्चरल मूवमेंट ज़ोरों पर था, तब बॉब एक पूरी पीढ़ी की आवाज़ बन गए थे. अमेरिका में उन्हें जनगायक और लोकगायक के रूप में बेशुमार सम्मान हासिल है। ठीक उसी तरह जैसे भारत में आल्हा और बिरहा गाने वाले गायकों का सम्मान है. 1965 में आए बॉब के गीत ‘लाइक अ रोलिंग स्टोन’ ने लोगों की चेतना को झिंझोड़कर रख दिया था।

 

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