देहरादून : सुरक्षा के मद्देनजर भारतीय वायु सेना ने किया युद्ध अभ्यास (वीडियो)

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नई दिल्ली : चीन एक ऐसा पडोसी देश है जिस पर आप कभी भी आंख मूंदकर भरोसा नहीं कर सकते क्योंकि अगर आप ऐसा करते हैं तो चीन आपकी पीठ में छुरा घोंप देगा इतिहास इस बात का साक्षी रहा है । पिछले साल ही डोकलाम में चीन ने भारत की सीमा में घुसपैठ का थी, जिसका भारतीय सेना ने मूंहतोड़ जवाब दिया था । चीन समय -समय पर भारत की सीमा में घुसने की कोशिश करता रहता है ।

चीन सीमा पर सुरक्षा के मद्देनजर भारतीय वायु सेना ने कमर कस ली है। पिछले कई दिनों से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर चल रही रिहर्सल को सोमवार को बड़ा रूप दिया है। इधर जौलीग्रांट में जहां फाइटर प्लेन टेकऑफ और लैंडिंग का अभ्यास किया गया, वहीं चीन सीमा के निकट उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर मालवाहक विमान उतारा गया।

देहरादून स्थित जौलीग्रांट एयरपोर्ट से सुखाई विमान ने पहली बार उड़ान भरी। भारतीय वायुसेना ने सोमवार को यहां अभ्यास किया। मंगलवार को भी संचालन जारी रहेगा। बताया जा रहा है कि इसका मकसद युद्ध की स्थिति में नागरिक हवाई अड्डों को तैयार रखना है। चीन की ओर से सीमा पर उकसावे वाली रणनीति के मद्देनजर यह तैयारी की जा रही है। जानकारी के अनुसार सुखोई-30 एमकेआई विमानों का संचालन जौलीग्रांट एयरपोर्ट से शुरू किया गया। इससे पहले गुरुवार को जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर सुखोई विमान ने टच एंड टेकऑफ किया था। जबकि मालवाहक विमान भी उतारा गया था। वहीं बीते शुक्रवार को भी दिन में काफी देर तक लड़ाकू विमान आसमान में मंडराते रहे। विमानों की आवाज से क्षेत्र में गड़गड़ाहट गूंज उठी। लोगों ने घरों की छतों से विमानों की आवाजाही को देखा। इस दौरान लोगों ने सेना की ताकत को देखकर उत्साह से तालियां बजाई।

उधर, भारतीय वायुसेना के बरेली बिंग 12 सदस्यीय दल ने चिन्यालीसौड हवाई अड्डे का स्थलीय जायजा लिया और एल-32 सुरक्षित लैंडिंग करवाई। वायुसेना के बरेली विंग से 12 सदस्यों का दल सुबह 11.30 बजे यहां पहुंचा। इस दौरान उन्होंने हवाई अड्डे का बारीकी से निरीक्षण किया और जनाकारी जुटाई। एल–32 मल्टीपरपज हवाई जहाज की हवाई अड्डे पर दो बार सुरक्षित लैंडिंग कराई। इस मौके पर कानूनगो मोहन सिंह राणा ने बताया कि बरेली विंग की ओर से इस अभ्यास का सिलसिला एक हफ्ते तक जारी रहेगा।

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