हल्द्वानी प्रकाश डेंटल टिप्स- रूट कैनाल उपचार से दूर होगा दांतों का अहसाय दर्द

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हल्द्वानी: दांत मनुष्य अंग का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। मौजूदा वक्त में भाग-दौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। उसी लिस्ट में दांतों की केयर भी आती है। दांतों का ठीक से ख्याल ना रखने के कारण उनमें इन्फेक्शन होने लगता है जिससे हम उसे सड़न बोलते हैं। दांत का दर्द सहन करना खासा मुश्किल रहता है। दांत में दर्द होने के कारण कान में भी दर्द होता है जो काफी अहसाह होता है। इस तरह के दांत दर्द को रोकने के लिए रूट कैनाल करना होता है। इस प्रक्रिया में दांत में इन्फेक्शन को पूरी तरह से बाहर निकालना होता है ।

हल्द्वानी प्रकाश डेंटल क्लीनिक के डॉक्टर अनुराग अग्रवाल ने बताया कि रूट कैनाल प्रक्रिया के बाद आपके दाँत को फिर से बहाल किए जाने के लिए जरूरी है। इसके बाद रोगी का दांत पहले जैसा हो जाता है और दर्द नहीं रहता हैं। रूट केनाल उपचार के लिए एंडोडोडोंटिक सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। एपीकोएक्टोमी के दौरान रूट का टिप या एपेक्स या संक्रमित उत्तक को हटाया जाता है जो दर्द का मुख्य कारण होती है। इसके बाद फिलिंग की जाती है ताकि रूट का अंतिम भाग सील हो जाये।

एक ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप  के उपयोग से एपीकोएक्टोमी सर्जरी की जाती है। यही वजह है कि एपीकोएक्टोमी सर्जरी को  एंडोडोडोंटिक माईक्रोसर्जरी भी कहा जाता है। एपीकोएक्टोमी सर्जरी की जरूरत तब पड़ सकती है यदि रूट केनाल के पुनः उपचार के बाद भी संक्रमण रह जाता हो। एपीकोएक्टोमी सर्जरी की सफलता कि दर लगभग 80% से 90% होती है। अगर एपीकोएक्टोमी सर्जरी के बाद भी दांत में संक्रमण रह जाता हो तो फिर दांत उखाड़ना ही पड़ता है।

डॉक्टर अनुराग अग्रवाल ने बताया कि कई बार रूट कैनाल के बाद भी रोगी का दांत दर्द ठीक नहीं होता है इसके कुछ मुख्य कारण है। उपचार के दौरान अगर कैनाल से यदि संक्रमण को पूरी तरह से नहीं निकला गया हो तो ये हो सकता है। इसके अलावा सभी केनाल्स के साफ ना होने से भी रूट कैनाल फेल हो सकता है। अगर दांतों में पुरानी फिलिंग की गई हो और किसी कारण से पुराने फिलिंग या दांत में संक्रमण हो गया हो या रिसाव होने लगा हो तो बैक्टीरिया वहां फिर से समा सकते हैं।

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