नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने आर्थिक मदद कर पोछे ट्रांस्पोर्टर प्रकाश पांडे के परिवार के आंसू

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हल्द्वानी: जीएसटी और नोटबंदी के कारण व्यापार में नुकसान के बाद आत्महत्या करने वाले ट्रांस्पोर्टर प्रकाश पांडे का परिवार अभी भी सरकार से मदद मांग रहा है।मृतक के अंतिम संस्कार के दिन आर्थिक मदद और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी की घोषणा के बाद ही शव का अंतिम संस्कार रानीबाग के चित्रशिला घाट पर किया गया था। मृतक के परिजनों को जिलाधिकारी ने सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुये 12 लाख की आर्थिक मदद व पत्नी को नौकरी देने की बात कही थी।बाद में रकम को 10 लाख किया और फिर इसे ठंडे बिस्तर में डाल दिया। पहले मदद का ऐलान और फिर मुकरने वाली सरकार अब कह रही है कि हम आत्यहत्या को बढ़ावा नहीं देते और अगर प्रकाश पांडे के परिवार की मदद करेंगे तो वो समाज में गलत उदाहरण पेश करेगा।

बता दें कि  काठगोदाम निवासी ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडे ने छह जनवरी को देहरादून में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के जनता दरबार में जहर खा लिया था। अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी।

सरकार आर्थिक मदद के वादे से मुकर गई तो तो दुखी प्रकाश पांडे का परिवार बुद्धपार्क में अपनी मांग के लिए आंदोलन में बैठ गया। दिन बीते लेकिन सरकार केवल तमाशा देखती रही। पांच दिन के बाद परिवार को विपक्ष का साथ मिला। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने 7 लाख 25 हजार रुपये की मदद पांडे परिवार को दी। ये रकम शहर के समाजसेवियों द्वारा एकत्रित की गई थी। इसके अलावा प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कहा कि पीडित परिवार को जल्द को 3 लाख रुपये की मदद और दी जायेगी। उन्होंने कहा कि वो कोशिश करेंगी कि मृतक प्रकाश पांडे की पत्नी को किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिल सके।

नेता प्रतिपक्ष ने इस बीच सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि सरकार समाज की बात कर रही है क्या वादा खिलाफी होना समाज में सही संदेश देता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक साल में अपना असली चेहरा दिखा दिया है।

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