पुणे में चमत्कार, 27 साल के बेटे को खो चुकी मां अपने बेटे के वीर्य से यूं बनी दादी

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नई दिल्ली: विज्ञान आज के युग में काफी आगे निकल चुका है। उसके पास ऐसी ताकत है जो किसी को कुछ भी दे सकती है। ऐसी ही मामला सामने आया है जहां विज्ञान के चमत्कार ने मां को उसा बेटा वापस दिलवा दिया।बेटे को खोने का गम धरती में सूबसे बुरा माना जा है। दो साल पहले कैंसर की वजह से अपने बेटे को खोने वाली एक मां ने एक सरोगेट मदर की मदद से अपने अन-ब्याहे बेटे प्रथमेश के जुड़वा बच्चों को जन्म दिलाया है। मामला पुणे का है और महिला नाम राजश्री पाटिल है जो पेशे से टीचर है।

प्रथमेश के जुड़वा बच्चों शुक्राणुओं की मदद से हुआ है जो उसकी मौत के बाद सुरक्षित रखे गए थे। प्रथमेश को ब्रेन ट्यूमर था। जिस वक्त उन्हें अपनी बीमारी के बारे में पता चला वो जर्मनी में थे। वो भारत से जर्मनी 2010 में चले गए थे। उस दौरान उनके वीर्य को संरक्षित कर लिया गया था। इस वीर्य का सरोगेसी में इस्तेमाल किया गया और 35 वर्षीय सरोगेट मदर ने एक बच्ची और एक बच्चे को जन्म दिया। निजी मीडिया संस्था से बात करते हुए राजश्री पाटिल ने कहा कि मुझे मेरा बेटा मिल गया है। मै और बेटा एक-दूसरे के काफी करीब थे। वोजर्मनी से इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहा था। डॉक्टरों ने इलाज के दौरान प्रथमेश को वीर्य संरक्षित करने को कहा था। प्रथमेश ने अपनी मां और बहन को अपनी मौत के बाद अपने वीर्य का नमूना इस्तेमाल करने के लिए नामित किया था

 

प्रथमेश  के संरक्षित वीर्य को एक ग़ैर-पारिवारिक दाता के अंडाणुओं से मेल कराया गया। मेल कराने के बाद इसे एक क़रीबी रिश्तेदार के गर्भ में डाल दिया गया। प्रथमेश के बच्चों ने 12 फ़रवरी को जन्म लिया। दादी राजश्री ने बच्चों को भगवान का आशीर्वाद बताते हुए पोते का नाम बेटे प्रथमेश के नाम पर रखा और बेटी का नाम प्रीशा रखा है। प्रथमेश की मां का अपने बेटे को वापस पाने का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। उन्होंने इसके लिए जर्मनी तक का सफर किया।उन्होंने जर्मनी जाकर बेटे का वीर्य हासिल करने के लिए सारी औपचारिकताएं पूरी कीं। वापस आकर उन्होंने पुणे के सह्याद्रि अस्पताल में आईवीएफ का सहारा लिया। अस्पताल की आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ सुप्रिया पुराणिक कहा कि ये मामला अनोखा था। मां अपने बेटे को किसी भी हालात में वापस पाना चाहती थी जिसने पूरे मामले को भावनाओं से जोड़ दिया।

 

न्यूज सोर्स-:http://www.bbc.com/hindi/india-43081193

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