देश में उत्तराखण्ड का कर्मचारी सबसे ज्यादा असंतुष्ट , कौन है जिम्मेदार !

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नई दिल्ली:उत्तराखण्ड सरकार अपने कर्मचारियों को हड़ताल से दूर रखने का प्लान बना रही है। ये इसलिए क्योंकि राज्य की छवि पिछले कुछ वक्त से हड़ताली प्रदेश के तौर पर होने लगी है। जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी संस्थान से खुश नहीं होता और हड़ताल पर चले जाते है। इस छवि के मामले में राज्य को देश में पहला स्थान मिला है। देश में उत्तराखण्ड के कर्मचारी सबसे ज्यादा असंतुष्ट है। यह रिपोर्ट ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट द्वारा जारी की गई है। रिपोर्ट को साल 2016 के आंदोलनों के आधार पर तैयार किया गया है।

बात साल 2016 की करें तो  उत्तराखंड में 21 हजार 966 आंदोलन किए गए। इसमें अन्य तरह के आंदोलन की संख्या सबसे अधिक 8778 है, लेकिन सेक्टवार आंदोलन की बात करें तो कर्मचारी वर्ग सबसे आगे नजर आता है। यहां तक कि श्रम, राजनीतिक व छात्र आंदोलन भी कर्मचारियों के आंदोलन से कोसों पीछे नजर आते हैं। कर्माचारी आंदोलन तो करते है लेकिन इसका नुकसान  राज्य की जनता का होता है। क्योकि अगर हॉस्पिटल के कर्माचरी हड़ताड़ में है तो रोगियों को उचित इलाज नहीं मिलेगा। अगर अध्यापक हड़ताड़ पर है तो छात्रों का नुकसान होगा। हड़ताड़ आवाज उठाने के नाम पर लोगों का नुकसान कर रही है। कर्मचारी कल्याण की दिशा में निरंतर प्रयास होने के बाद भी यह स्थिति गंभीर सवाल खड़े करती है और सोचने पर भी विवश करती है कि क्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र जैसे विशाल राज्यों से अधिक आंदोलन उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में हो रहे हैं। सवाल यह भी कि ताबड़तोड़ आंदोलनों से प्रदेश के विकास पर क्या असर पड़ता है या छात्र-छात्राओं को इसकी क्या कीमत चुकानी पड़ती होगी।

हालांकि एक अच्छी बात यह भी कि सामुदायिक वैमनस्य को लेकर वर्ष 2016 में उत्तराखंड में एक भी आंदोलन रिकॉर्ड नहीं किया गया। जबकि पूरे देश में इस तरह के 6587 आंदोलन किए गए हैं और इस मामले में दिल्ली, महाराष्ट्र व कर्नाटक टॉप में रहे।

 

न्यूज सोर्स-दैनिक जागरण

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