दिल्ली :आम आदमी पार्टी की सरकार के तीन साल पूरे

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नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी की सरकार आज दिल्ली में अपने तीन साल पूरे कर रही है । आइए एक विश्लेक्षण आम आदमी पार्टी की सरकार के तीन साल पर ।

साल 2015 में विधानसभा की 70 में से 67 सीटें जीतकर दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुई आम आदमी पाटी (आप) का विवादों के साथ पुराना नाता रहा है। एक समय था जब आम आदमी पार्टी को दिल्ली में स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद माना जा रहा था कि पार्टी देशभर में तेजी से बढ़ेगी, लेकिन चंद दिनों बाद संस्थापक सदस्य योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के साथ सीएम केजरीवाल के झगड़े के कारण पार्टी निरंतर विवादों में घिरती गई। ‘आप’ सरकार के कई ऐसे विवाद रहे हैं जिसने पार्टी की नींव को हिलाकर रख दिया, कभी अपने दूर हो गए तो कभी परायों को अपनों से अधिक महत्व दिया गया। सियासी समीकरण बदलते रहे और पार्टी में अदरूनी कलह कई मौकों पर सतह पर आ गई।

विवादों की बात हो सबसे पहले ‘आप’ के विधायक कपिल मिश्रा का नाम सामने आता है। कई मौकों पर कपिल ने केजरीवाल और दिल्‍ली सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यह सिलसिला उस वक्त शुरू हुआ जब कपिल ने बड़ा खुलासा करते हुए आरोप लगाया कि 10 हजार गाड़ियों में नकली CNG किट लगी है। दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी के निलंबित विधायक कपिल मिश्रा ने आप नेता सत्येंद्र जैन और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ऊपर लगाए गए भ्रष्टाचार के सबूत लोकायुक्त को सौंपे। मिश्रा के मुताबिक उन्होंने 16 हज़ार पन्नों का सबूत तैयार किया, जिसमें सत्येंद्र जैन और केजरीवाल के भ्रष्टाचार से जुड़े कई कागजात हैं।

सीबीआइ दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के घर पहुंची। । केजरीवाल सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के अलावा दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर पर सीबीआइ पूछताछ करने पहुंची। कहा गया कि CBI ‘टॉक टू एके’ मामले को लेकर पूछताछ कर रही है।

ओखला से विधायक अमानतुल्ला खान ने ‘आप’ के बड़े नेता कुमार विश्वास को भाजपा और आरएसएस का एजेंट बताया था। जिसके बाद कुमार विश्वास ने कहा था कि खान उन साजिशकर्ताओं का मुखौटा बने हुए हैं, जो चाहते हैं कि वह पार्टी से बाहर हो जाएं। कुमार विश्वास की नाराजगी के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने खुद उन्हें मनाया था और अमानतुल्ला खान को पार्टी से सस्पेंड कर दिया था। इस मामले में ट्विस्ट तब आया जब निलंबित किए गए विधायक अमानतुल्ला खान को विधानसभा की समितियों में अहम जिम्मेदारी सौंपी गई।

 

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